रोग और संकटों से रक्षा करने वाला दिव्य कवच भी माना गया है। गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक प्रत्येक श्रद्धालु के घर में पूजन-पाठ के लिए एक आवश्यक ग्रंथ के रूप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।
जिसमें देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र मार्कंडेय पुराण से लिया गया है और इसमें 700 श्लोक हैं
गोरखपुर द्वारा प्रकाशित “संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण (सचित्र
भक्ति–गीत और कृष्ण–गीत के स्वरूपों का गूढ़ विवेचन करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि प्रेम की यह लीलामयी अभिव्यक्ति भक्त को दिव्य अनुभूति की ऊँचाइयों पर ले जाती है। पाठक जब इस वेणुगीत के रस में लीन होता है
गोरखपुर ने 2010 में प्रकाशित किया है। यह पुस्तक राधा रानी की कृपा प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली साधना के रूप में प्रस्तुत की गई है।
Yog Ank (Kalyan) -616 Pad Ratnakar रोग और संकटों से रक्षा() 616, , 1008 , , , , , , , , , ( 616) ,